Nafas ki gazlen

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Monday, May 24, 2010

ये मेरी खा़मशी जो बे जुबाँ है,
मिरे अलफ़ाज़ का ही तर्जुमाँ है।

1 comment:

  1. भाई जान,
    दो गुजारिशें हैं:-
    पहली: अपना ब्लॉग अप डेट करते रहें, इसे यूँ तनहा न छोड़ें.
    दूसरी : आपकी किताब हासिल करने का रास्ता बताएं.
    मेरा मोबाइल नम्बर है +919860211911

    नीरज

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